ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 7

 मैं जब घर आई तो मेरे पास ढंग की रहने या पढ़ने-लिखने की जगह नहीं थी। इतने सालों खुले और ठीक-ठाक से (युनिवेर्सिटी) घरों में रहकर, एक कमरे या एक छोटे-से मकान में सिमट जाना, घुटन जैसा-सा था। अब अपना घर है और बचपन वहाँ बिता है, तो आदत तो वक़्त के साथ पड़ जाएगी।Continue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 7”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 6

 घरों से प्लॉट की तरफ, वहाँ पे लेट (तालाब) की ज़मीन, आसपास लगते लोगों द्वारा हड़पने की कहानी और यूक्रेन युद्ध? अज़ीब किस्से-कहानी हैं ना? और उससे भी ज्यादा अज़ीब, संसार के किसी और कौने में, ऐसे-ऐसे युद्धों की सामान्तर घढ़ाईयाँ?    यहाँ चाचा के लड़के का अहम रोल रहा? या जो राजनीतिक सुरँगे, उससेContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 6”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 5

 यूक्रेन युद्ध शुरु हौगा।   बला, माँ-बेटी मैं कीमे छोटी-मोटी कहा सुणी तै ना हो री? बेटी का सामान आ गया, वो कोई घर खाली कर रही थी यूनिवर्सिटी में शायद, और इस माँ के छोटे-से घर पर इतना सामान रखने की जगह नहीं।   ले भाई, वो अंडी नै फेसबुक पै झंडा गाड दिया।  अच्छा। लेContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 5”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर और युद्ध? 4

 युद्ध, युद्ध, युद्ध?  ऐसा ही कुछ सुन रहे हैं क्या आप? या आप जो न्यूज़ चैनल्स देखते हैं, वहाँ सब शांति शांति है? ऐसे कैसे? ऐसी ही दुनियाँ में हैं हम? यहाँ भी अगर आप भारत के न्यूज़ चैनल्स देखेँगे तो वो कुछ कहते नज़र आएँगे या कहो की चीखते नज़र आएँगे और पाकिस्तान केContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर और युद्ध? 4”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 3

 नई सीरीज शुरु हो गई? चल तो पहले से रही है, थोड़ा पास से समझ आनी अब शुरु हुई है? पीछे की कई सारी पोस्ट को भी धीरे धीरे लगाएँगे इस सीरीज में। अभी नंबरिंग यहीं से शुरु कर दें?   जो अपनी बैंक की कॉपी सँभालने लायक तक नहीं, वो जमीन के सौदे क्या करेगा? कौन-सेContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 3”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 2

 जो अपनी बैंक की कॉपी सँभालने लायक तक नहीं, वो जमीन के सौदे क्या करेगा? कौन-से दिमाग से करेगा? जब 5 लाख कुछ रुपए भाई के बैंक आए, उससे पहले एक यस बैंक का नाटक रचा गया। किस तारीख को आए ये 5 कुछ, किसी के खाते में? किस बैंक का है वो खाता? अहमContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 2”

ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 1

 ज़मीन खोरों के जबड़ों में किसान और आम इंसान?  या ज़मीन खेतखलिहान  और शिक्षा और राजनीती के नाम पर, ज़मीन हड़पने के अभियान?   ये सब यही है क्या? रोज-रोज आती  खामखाँ-सी, फ़ालतू-सी इमेल्स?  स्पैम जैसे कोई?  या?  बीच में बलदेव सिंह की ज़मीन और दोनों तरफ? शिक्षा के नाम पर ज़मीनखोर? ज़मीनी धंधे वाले? हरदेवContinue reading “ज़मीनखोरों के ज़मीनी धंधे, शिक्षा और राजनीती के नाम पर 1”

स्टीकर ले लो स्टीकर 2 (Social Tales of Social Engineering)

स्टीकर जो बड़े साहब, बड़े लोग (?), राजनीतिक पार्टियाँ या कम्पनियाँ आप पर, हम सब पर, हर वक़्त चिपकाने की कोशिश में रहते हैं। जितने ज्यादा वो उसमें सफल होते जाते हैं, उतना ज्यादा उनका फायदा और हमारा, आपका, आम आदमी का नुक्सान होता जाता है।    अभी पिछले कुछ सालों में हुई घटनाओँ याContinue reading “स्टीकर ले लो स्टीकर 2 (Social Tales of Social Engineering)”

कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, जैसी-सी कहानियाँ

अभी पिछले साल (?) दो भाई-बहन दुबई की सैर पे गए। हाँ, तो क्या खास है? दुनियाँ जाती है। बहन की फिर शादी हो गई, इंटरकास्ट और भाई ने ज़मीन हड़प ली, किसी अपने की ही। होता रहता है, इसमें भी क्या खास है? किसी पियक्कड़ की ज़मीन, कोई भी हड़प ले? फिर ये तोContinue reading “कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, जैसी-सी कहानियाँ”

आपका घर कहाँ है?

आपका घर कहाँ है? ये प्रश्न  “बेचारे तबकों” में शायद हर औरत का है?  नहीं।  हर बेहद गरीब इंसान का है?  फिर इससे फर्क नहीं पड़ता  की आप लड़की हैं या लड़का  अगर लड़की हैं तो  इससे भी फर्क नहीं पड़ता  की आप दादी हैं? माँ हैं? बुआ हैं? बहन हैं? बेटी हैं? या बहु? Continue reading “आपका घर कहाँ है?”